Friday, 17 January 2020

बचपन


शाम के धुँधलके में
बहुत याद आता है
वो अपना बचपन ।

बड़े से आँगन में
वो
गहरा सा कुआँ ।

देहरी के पार
चौके में
वो
अंगीठी का धुआँ ।

पाँत में खाना
वो
रस का खजाना ।

गर्मी में
वो
छत पर सोना,
तारों की छाँव में
बिछा
वो
ठंढा बिछौना ।

बारिश में
वो
भीगते हुए भागना
और
भागते हुए
वो
भीगना ।

सर्दी में
वो
अंगीठी का तापना
फिर
रजाई में
वो
दुबकना ।

मेलों में झूले
वो
झूलों की पींगें

मोहल्ले के दोस्तों से
वो
मारी हुई डींगें ।

याद आता है
बहुत याद आता है.......
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1 comment:

  1. Beautifully explains the best part of anyone's life - childhood 😍

    Taniya

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