Monday, 2 November 2020

64. दिन और रात

 


 









दिन और रात

का

एक अजब सा

नाता है

एक हो

तभी दूसरा

आता है 

 

जब आती है

रात

तो

दिन छिप जाता है

और

बिता कर रात

दिन फिर

निकल आता है 

 

दिन और रात का...

 

कभी-कभी

अचानक

दिन में भी

अन्धियारा छाता है

पर

थोड़ा-सा

धीरज धरें

तो

सूरज

निकल ही आता है

 

दिन और रात का...

 

 

घनी, काली रात में

चाँद

निकल

आता है

और,

शीतल चाँदनी में

मन

शीतलता पाता है

 

दिन और रात का...

 

रात की

गहराती नींद में

जीवन

विश्राम पाता है

सवेरे के आने तक

मन तरोताज़ा

हो जाता है 

 

दिन और रात का...

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