मानव-रूप में आते राम
आदर्श-रिश्ते निभाते राम
सत्य-मार्ग दिखाते राम ।
अयोध्या में जन्मे थे राम
जन-जन के मन में थे राम,
जन-जन के मन में थे राम,
मात-पिता के प्यारे थे राम
चारों भाइयों में न्यारे थे राम ।
विश्वामित्र के बालक थे राम
ऋषियों के पालक थे राम,
दानव-संहारक थे राम
अहिल्या के तारक थे राम ।
शिव-धनुष-भंजन करते राम
परशुराम-दर्प-मर्दन करते राम,
जनक-क्षोभ-हरण करते राम
सिय-जयमाल-वरण करते राम ।
पिता के वचन निभाते राम
वन गमन का आदेश पाते राम,
सबको धीर बंधाते राम
सहज वन को जाते राम ।
पर्ण-कुटी बनाते राम
कंद-मूल-फल खाते राम,
सिय का हठ मानते राम
स्वर्ण-मृग के पीछे जाते राम ।
(लौटने पर)
सिय को नहीं पाते राम
शोक-सागर में समाते राम,
वानर-मित्रता अपनाते राम
सुग्रीव को राजा बनाते राम ।
वैदेही-वियोग में व्याकुल थे राम
शुभ-समाचार को आकुल थे राम,
वानरों की कुशल सहेजते राम
हनुमान जी को सुदूर भेजते राम ।
(हनुमान जी से)
सिय का समाचार पाते राम
चरणों से उन्हें उठाते राम,
अपने कंठ से लगाते राम
संग उन्हें बैठाते राम ।
विभीषण को अपनाते राम
सागर पर पुल बँधवाते राम,
सेना को पार लगाते राम
रण की योजना बनाते राम ।
रावण को युध्द में हराते राम
अधर्म पर विजय पाते राम,
विभीषण को लंकेश बनाते राम
सीता को वापस लाते राम ।
लौट अयोध्या आते राम
जन-नायक बन जाते राम,
आदर्श राज्य चलाते राम
सब पर सुख बरसाते राम ।
काश,
आज भी आ जाते राम
हर मानस में बस जाते राम,
दुःख-दर्द मिटा जाते राम
अमृत-वर्षा कर जाते राम ॥

Lord Ram is not only an idol but an ideal for our behaviour in daily life. He gave us norms for human dealings with our family, friends and even our enemies. Jai Shri Ram!
ReplyDelete