Friday, 3 April 2020

पर्वत से शिक्षा




चलते जाओ तुम निरन्तर
यदि पाना है अपना शिखर 

यदि चलोगे कठिन डगर पर
तभी तो पहुँच पाओगे ऊपर

जितना पहुँचते जाओ ऊपर
भरते जाओ शीतलता अंदर

परन्तु,
रुक मत जाना पा कर शिखर
पर्वत तो अभी फैले हैं चारों ओर

जीवन में आये पर्वतों से
तुम कभी मत घबराना
अपना कर सूझ-बूझ
इन्ही में से मार्ग बनाना

1 comment:

  1. Hills and mountains are symbolized as the problems and difficulties of our life in this poem. One who keeps walking is able to surmount them.
    Hope it meets approval of all who care to read it.

    ReplyDelete

64. दिन और रात

    दिन और रात का एक अजब सा नाता है एक न हो तभी दूसरा आता है   ।   जब आती है रात तो दिन छिप जाता ...