Hindi kavitayein. My poems relate to all walks of life. These are the creations of an expressive and sensitive heart. I request all to visit my blog and post their reviews on my e mail vermarajesh55@gmail.com or facebook account. Thanks.
Wednesday, 29 January 2020
Tuesday, 21 January 2020
Sunday, 19 January 2020
शाम सर्दी की
शाम सर्दी की
लगती है उदास सी ।
भरी
ठंढे कुँहासे से,
लदी
घने अंधेरों से,
बढ़ाती
बोझ मन पर,
सुलगाती
अरमानों को,
टँगी है
कटी पतंग सी ।
स्तब्धता
बन गई है गति
जीवन की ।
बढ़ते अंधेरों के बीच
रोशनी
चौंकाती है,
डराती है ।
सर्दी की शाम
शायद ठहरी है ।
रहने दो
मुझे अब अंधेरों में ही
खोने दो यहीं,
सोने दो यहीं ।
रात तो आनी
अभी बाकी है,
पर
नींद अब आती है,
नींद बहुत आती है ॥
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Friday, 17 January 2020
सूर्य
युगों सेप्राणों का
दाता है सूर्य ।
रात के
अंधियारे को
मिटाता है सूर्य ।
ऊषाकाल में
लालिमा
लाता है सूर्य ।
हमें
ऊर्जावान
बनाता है सूर्य ।
सहता है स्वयं का
भीषण ताप वह
पर
जग को
प्रकाश से
नहलाता है सूर्य ।
करता नहीं है
तनिक भी भेदभाव वह
सभी पर
कृपा बरसाता है सूर्य ।
मेघों से आच्छादित
अम्बर का
चीर कर अन्धेरा
ला कर
अपनी रश्मियाँ
बिखराता है सूर्य ।
प्रभु का वरदान है वह,
पावन और महान है वह,
इसीलिये अर्घ्य से
पूजा जाता है सूर्य ।
सूर्य है प्रतीक-
नियमों के
पालन का,
जीवन में
अनुशासन का,
मेघों में भी
न छुपने का,
ऊँचाइयों पर
चमकने का,
अपना ताप
स्वयं सह जाने का
पर
सभी के जीवन को
आलोकित कर जाने का ॥
___________________
बचपन
शाम के धुँधलके में
बहुत याद आता है
वो अपना बचपन ।
बड़े से आँगन में
वो
गहरा सा कुआँ ।
देहरी के पार
चौके में
वो
अंगीठी का धुआँ ।
पाँत में खाना
वो
रस का खजाना ।
गर्मी में
वो
छत पर सोना,
तारों की छाँव में
बिछा
वो
ठंढा बिछौना ।
बारिश में
वो
भीगते हुए भागना
और
भागते हुए
वो
भीगना ।
सर्दी में
वो
अंगीठी का तापना
फिर
रजाई में
वो
दुबकना ।
मेलों में झूले
वो
झूलों की पींगें
मोहल्ले के दोस्तों से
वो
मारी हुई डींगें ।
याद आता है
बहुत याद आता है.......
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