Monday, 13 January 2020

तुम ही


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हे ईश तुम ही
जगदीश तुम ही
देते हो आशीष तुम ही ।

परम ब्रह्म सुखधाम तुम ही
राम और घनश्याम तुम ही ।

वंदना का हो तार तुम ही
प्राणों का आधार तुम ही ।

देते हो मँझधार तुम ही
करते बेड़ा पार तुम ही ।

साँसों की हो डोर तुम ही
अंधियारे की भोर तुम ही ।

जग के कण-कण में तुम ही
जीवन के पल-पल में तुम ही ।

साँझ और सवेरा तुम ही
सबका रैनबसेरा तुम ही ।

करुणा के सागर हो तुम ही
गिरधर नटवर नागर तुम ही ।
   
बाइबिल और कुरान में तुम ही
बसे हो गीता के ज्ञान में तुम ही ।

ईसा और नानक में तुम ही
जग के पालक हो तुम ही ।

हे करुणासिंधु दया करो
अंतर्मन के द्वंद्व हरो ॥

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