______
हे ईश तुम ही
जगदीश तुम ही
देते हो आशीष तुम ही ।
परम ब्रह्म सुखधाम तुम ही
राम और घनश्याम तुम ही ।
वंदना का हो तार तुम ही
प्राणों का आधार तुम ही ।
देते हो मँझधार तुम ही
करते बेड़ा पार तुम ही ।
साँसों की हो डोर तुम ही
अंधियारे की भोर तुम ही ।
जग के कण-कण में तुम ही
जीवन के पल-पल में तुम ही ।
साँझ और सवेरा तुम ही
सबका रैनबसेरा तुम ही ।
करुणा के सागर हो तुम ही
गिरधर नटवर नागर तुम ही ।
बाइबिल और कुरान में तुम ही
बसे हो गीता के ज्ञान में तुम ही ।
ईसा और नानक में तुम ही
जग के पालक हो तुम ही ।
हे करुणासिंधु दया करो
अंतर्मन के द्वंद्व हरो ॥
......................

No comments:
Post a Comment