Monday, 13 January 2020

वो बूढ़ा बरगद का पेड़




























वो 
बूढ़ा बरगद का पेड़-                            

फैलाये, दूर तक अपनी शाखायें
जमीन से है जुड़ा 
है शान से खड़ा
तने से तना 
है बहुत ही घना ।

वो 
बूढ़ा बरगद का पेड़

सदियों से पूजा जाता, 
सबसे है उसका नाता
सभी को अपनी छाँव में सुलाता ।

वो 
बूढ़ा बरगद का पेड़

क्या तनिक भी झुका है? 
बढ़ने से रुका है?
शरमाया-घबराया है?
या
कभी पछताया है?
वो तो 
और भी हरियाया है ।

वो 
बूढ़ा बरगद का पेड़

मानता है, 
भली भाँति जानता है
कि
दीर्घायु देती है- 
अनुभव का ज्ञान,
मान और सम्मान, 
यह तो है जीवन में
प्रभु का वरदान ।

बूढ़ा हमें बनाता है,
बेवजह का सोचना,
बचपने का खोना, 
सामन्जस्य न होना ।

यदि हम 
फिर से बच्चे बन जायें,
हँसे-खिलखिलायें, 
गीत गुनगुनायें,
कुछ सीखें-सिखायें,
तो
न कभी घबरायेंगे, 
न शर्मायेंगे-पछतायेंगे
बल्कि 
उस बूढ़े बरगद की तरह हरियायेंगे ।

जड़ों को जमीन से जोड़े हुए
और भी परिपक्व हो जायेंगे ।।
........................

1 comment:

  1. This is my perception of the so called old age. In my view, age is just a number. Shri Amitabh Bachchan is the best example. Can anybody call him old? I consider him to be the best example of my this poem.

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