Tuesday, 14 January 2020

नदी की तरह




बना लो  जीवन अपना
नदी की तरह।

कर लो  मन अपना
नदी की तरह।

पिघला कर बर्फ निकलो
नदी की तरह।

बहते रहो सदा
नदी की तरह।

पी जाओ कलुष सारा
अंदर-बहुत-अंदर
पर
मत हो प्रदूषित
नदी की तरह।

यदि आवे आवेश
 या
बढ़ जाये पानी,
मत तोड़ो किनारे
नदी की तरह।

तेज हो जायें
किरणें सूर्य की
तो
और भी चमको 
नदी की तरह।

रुकोगे तो बनोगे
तालाब जैसे
इसलिये बनाओ
गति को पहचान
नदी की तरह।

अपनाओ रास्ते
टेढ़े या मेढ़े
मिलोगे आखिर
अथाह सागर में ही
नदी की तरह॥

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