
लूडो और साँप-सीढ़ी
मिल कर बनायें
खेल जीवन का,
फेंक कर पासा
ऊपर वाला
निकालता नंबर सभी का ।
किसी को देता
छः-छः-पाँच
उसकी किस्मत मोटी,
कोई पाता
क्योंकि लाया
किस्मत खोटी ।
गोटी के रंग को ले कर
सब आपस में हैं लड़ते,
एक दूजे की गोटी पीट कर
आगे को हैं बढ़ते ।
कोई सीढ़ी-दर-सीढ़ी
पा कर
ऊपर चढ़ता जाता
और
किसी को साँप
काट-काट कर
नीचे पहुँचा जाता ।
यहाँ जुटे हैं सभी
अपनी.अपनी गोटी
दौड़ाने में
पर
किसी-किसी का
जीवन कट जाता
बस अपनी गोट
बचाने में ।
चाहे बढ़ जाओ आगे
या
रह जाओ पीछे,
यारों पहुँच जाओ ऊपर
या
रह जाओ नीचे ।
अन्त में जातीं सभी गोटियाँँ
एक ही घर के अन्दर,
जीवन और लूडो के खेल में
पाया क्या कुछ अन्तर?
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Similarities between the two board games-Ludo and Snake & Ladder have been brought in this poem.
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