
नारी,
नाम नहीं है
केवल व्यक्ति का,
यह तो प्रतीक है
साधना और शक्ति का ।
नारी,
के मन में
है भरी
प्रेम की भावना
और
समर्पण की कामना ।
नारी है,
पुत्री और भगिनी
माँ और पत्नी
नानी और दादी,
वही है बनाती
आधी आबादी ।
नारी,
धारा जीवन की,
सही दिशा में
है मोड़ती,
चाहे कोई भी
रूप ले
कुलों को
है जोड़ती ।
नारी,
बना रही है
हर क्षेत्र में
नई पहचान,
पंख ले कर
भर रही है
ऊँची उड़ान ।
आओ,
करें नारी का
सम्मान
क्योंकि
वही बढ़ायेगी
हम सब का
मान ॥
This poem is about woman who is half the population. She needs to be given due importance and pride of the place
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