Tuesday, 10 March 2020

होली तो हो-ली


वो,
छाया चौतरफा
होली का रंग,
शोर-शराबा
और हुड़दंग ।

वो,
अबीर और गुलाल का
फैला गुबार,
करता आकाश को
पीला और लाल ।

वो,
पिचकारी से छूटती
पानी की धार,
छतों से बरसती
रंग की बौछार ।

वो,
गुझिया, मालपुआ
और पकवान
रस की खान थे
ये होली की जान ।

वो,
होली के गीत गाती
मस्तानों की टोली,
दोस्तों की बोली में
हँसी-ठिठोली ।

वो,
ढोल की थापों पर
झूमता यौवन,
हर्ष से सराबोर
जन-जन का तन-मन ।

वो होली
तो बस
अब हो-ली ।

अब तो,
होली सिमट गई है,
व्हाट्स ऐप के मेसेज
और
फ़ेसबुक के लाइक्स में;
करोना वायरस से बचाव
और
राजनीति की सफाई में ।

यदि,
रहा यही हाल,
तो
बीतने दो दस साल,
एलेक्सा के बच्चों की टोली
के साथ ही मनेगी
अब सबकी होली ।

2 comments:

  1. Friends,
    This is my take on Holi festival of the day and how I see it beyond. We are constantly losing our heritage in the name of modernity.
    Let's preserve it with all our might.
    Send me your opinion by posting your comments.
    Thanks

    ReplyDelete

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