जीवन का ताना-बाना
बनता है धागों से;
बनता है धागों से;
कुछ धागे हैं
रिश्तों के
तो
थोड़े-से
ख्वाबों के;
कुछ हैं अहसासों के
और
बाकीअरमानों के।
रिश्तों के धागों में से
कुछ का रंग
पड़ा है कच्चा;
अहसासोंऔरअरमानों में
भरा है
हकीकत का रंग पक्का।
जहाँ,
कच्चे धागों ने किया है
जीवन को कुछ बदरंग;
वहीं
पक्के धागों ने भरा है
जीवन में हर रंग।
जब भी चली
स्वार्थ की कैंची,
विपदा का अंधेरा छाया;
कच्चे धागों ने
तुरन्त ही
अपना रूप दिखाया।
आज पक्के धागे न होते
तो
क्या जीवन बुन पाता;
अहसासों, ख्वाबों
और अरमानों के
धागों से ही तो
ताना-बाना
है टिक पाता।।

This poem describes the role of threads that weave the fabric of life.
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