Tuesday, 7 April 2020

भोर


जब,
अचानक अमावस आ जाये,
काली-सी घटा छा जाये,
गहरे घने अँधियारे में
न कोई राह  नज़र आये ।

जीवन में बढ़ जाये संत्रास 
मत छोड़ना तुम अपनी आस,
रखना  मन में ये विश्वास
भोर है कहीं आस ही पास ।

सूर्य का जगमग प्रकाश
करेगा तम का विनाश. 
पक्षियों के मधुर कलरव से
गूँजे उठेगा आकाश ।

सुनहरी भीनी-सी भोर 
लायेगी आशा की डोर,
भर कर तन-मन में उत्साह
बिखेरेगी खुशियाँ चहुँ ओर ॥



2 comments:

  1. यह कविता निराशा को छोड़ आशा को अपनाने का संदेश देती है।

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  2. सुंदर दिखते हो। यथार्थ भी।

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