Sunday, 24 May 2020

आ जाओ न पापा



आज,

आई जो याद

पापा की;

 

तो फूट पड़ी

रुकी हुई 

एक सिसकी।

 

लगा ऐसा

जैसे

बहुत प्यार से

उन्होने बुलाया हो,

 

बैठा कर

अपने पास

बचपन को

फिर से दोहराया हो।

 

आई

कानों में वही आवाज़

चलो,

चॉक-बार खायेंगे

और

तुम्हे अच्छी सी

ड्रेस दिलायेंगे।

 

कर रहा है मन,

फिर से छोटी

हो जाऊँ;

खूब शरारत कर

उन्हे सताऊँ;

उछल-कूद कर

नाचूँ-गाऊँ;

उधम मचा कर

थोड़ी सी डाँट खाऊँ।

 

काश,

एक बार

तो आयें पापा;

देख मुझे सजा-सँवरा

सुख पायें पापा;

सहला कर

माथे को मेरे

मेंह,आशीषों की

बरसायें पापा।

 

एक बार,

बस,

एक बार,

आ जाओ न पापा॥

1 comment:

  1. Feelings of a girl missing and remembering her father after his demise.

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