मेरे जीवन में,
ले कर
ढेरों रौनक
तू आई,
तुझसे थी घर में
हर खुशी समाई ।
फिर,
तेरे घर से स्कूल
और
स्कूल से कॉलेज
जाने का
सिलसिला चला ।
समय कब-कहाँ भागा
पता ही नहीं लगा ।
हर जगह बढ़ाया तूने
हमारा मान,
तू बनी
हमारा अभिमान ।
जल्दी ही,
तेरी शादी का
वह दिन भी आया
था जिसमें
ढेरों उल्लास समाया ।
चमकती-दमकती
एक अनमोल रात
धूमधाम से
आ गई बारात ।
जयमाल-फेरों में बीती
सारी रात
और आया
विदा का प्रभात ।
डरता था
इसी वेला से
मैं सदा
क्योंकि
करना था
दिल के टुकड़े को
ख़ुद से जुदा ।
लाल-जोड़े में लिपटी
जब तू
सामने आई थी,
तुझे विदा करने में
आँखों ने
निर्झरी बहाई थी ।
बह रहा था
उस अश्रु-धारा में
एक पिता का
नेह-आशीष-प्यार,
लगा जैसे
लुट रहा हो
मेरा संसार ।
दूसरे दिन,
जब
हँसती-खिलखिलाती
तू आई थी,
हँसी-ठिठोली के बीच
आँखें फिर भर आई थीं ।
बेटी, कितना है
तेरा अहसान,
कि पा गया हूँ
दामाद के रूप में
एक और संतान ।
सब कुछ वारी ।
तुझसे ही है रोशन
दुनिया हमारी ।
बस,
दिये हुए संस्कार
कभी न भूलना,
दोनो कुलों को
प्यार से जोड़ना ॥
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ReplyDeleteThis poem expresses genuine love and affectionate feelings of a father for his daughter.
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