Friday, 17 January 2020

माँ


माँ,
एक छोटा सा शब्द
पर
कितना गहरा,

छिपाये है अपने अंदर
ममता.भरा
सुन्दर-सा चेहरा ।

माँ
नहीं थीं,
केवल
शरीर,

वो तो थीं
एक
परम-आत्मा।

केन्द्र था
उनके जीवन का
छोटा-सा
हमारा घर-बार,

बसा था
उस में ही
उनका पूरा संसार ।

जीवन-भर की
उनकी पूजा,

दे रही है
जीवनी-शक्ति हमें

उन्होने ही तो
सिखाई थी
प्रभु की भक्ति हमें ।

कैसे मानूँ
कि वे
नहीं हैं
अब यहाँ,

लगता तो है यही
कि
वे हैं यहीं
बिल्कुल यहाँ ॥
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