माँ,
एक छोटा सा शब्द
पर
कितना गहरा,
छिपाये है अपने अंदर
ममता.भरा
सुन्दर-सा चेहरा ।
माँ
नहीं थीं,
केवल
शरीर,
वो तो थीं
एक
परम-आत्मा।
केन्द्र था
उनके जीवन का
छोटा-सा
हमारा घर-बार,
बसा था
उस में ही
उनका पूरा संसार ।
जीवन-भर की
उनकी पूजा,
दे रही है
जीवनी-शक्ति हमें
उन्होने ही तो
सिखाई थी
प्रभु की भक्ति हमें ।
कैसे मानूँ
कि वे
नहीं हैं
अब यहाँ,
लगता तो है यही
कि
वे हैं यहीं
बिल्कुल यहाँ ॥
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