डर जाते हो हारने से
इसीलिये तो
जीत नहीं पाते ।
छिपे रहते हो भीड़ में
इसीलिये तो
आगे नहीं आते ।
लादे हो बोझ हीनता का
इसीलिये तो
मौके हो गँवाते ।
कहीं हँस न दे कोई
इसीलिये तो
बोल नहीं पाते ।
जब,
कूदोगे रण में
तभी तो जीत पाओगे ।
यदि,
मिल भी गयी हार
तभी तो सीख पाओगे ।
जब,
चलाओगे स्वयं गाड़ी
तभी तो मंज़िल पाओगे ।
यदि,
गिर कर गये संभल
तभी तो उठ पाओगे ॥
इसीलिये तो
जीत नहीं पाते ।
छिपे रहते हो भीड़ में
इसीलिये तो
आगे नहीं आते ।
लादे हो बोझ हीनता का
इसीलिये तो
मौके हो गँवाते ।
कहीं हँस न दे कोई
इसीलिये तो
बोल नहीं पाते ।
जब,कूदोगे रण में
तभी तो जीत पाओगे ।
यदि,
मिल भी गयी हार
तभी तो सीख पाओगे ।
जब,
चलाओगे स्वयं गाड़ी
तभी तो मंज़िल पाओगे ।
यदि,
गिर कर गये संभल
तभी तो उठ पाओगे ॥

Friends,
ReplyDeleteLife is definitely tough but we have to be tougher.
We have to be not only Positive Thinkers but Possibility Thinkers as well.
I invite your comments as well.
Hope to get your support.
Thanks
Rajesh C. Verma
Very nice poem
DeleteThank you.
DeleteIt's true....👌🙏
ReplyDeleteThanks. Look fwd to your support.
DeleteVery true
DeleteThanx a lot
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