तय
है
मौत
का आना एक दिन
पर
क्या
डर कर
हम
जीना छोड़ दें?
तय
है...
पर
क्यों
न बढ़
जीवन
में हर बूँद
ज्ञान
की निचोड़ लें?
तय
है...
पर
क्यों
न कर
हर कोशिश
धारा
को मोड़ लें?
तय
है...
पर
क्यों
न
सारे
सुख
आज के
बटोर लें?
तय
है...
पर
क्यों
न एक
नई
धुन
जीवन
में जोड़ लें?

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