अचानक अमावस आ जाये,
काली-सी घटा छा जाये,
गहरे घने अँधियारे में
न कोई राह नज़र आये ।
जीवन में बढ़ जाये संत्रास
मत छोड़ना तुम अपनी आस,
रखना मन में ये विश्वास
भोर है कहीं आस ही पास ।
सूर्य का जगमग प्रकाश
करेगा तम का विनाश.
पक्षियों के मधुर कलरव से
गूँजे उठेगा आकाश ।
सुनहरी भीनी-सी भोर
लायेगी आशा की डोर,
भर कर तन-मन में उत्साह
बिखेरेगी खुशियाँ चहुँ ओर ॥
यह कविता निराशा को छोड़ आशा को अपनाने का संदेश देती है।
ReplyDeleteसुंदर दिखते हो। यथार्थ भी।
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